1 हे यहोवा, मेरी बातें सुन, मेरे कराह पर ध्यान दे।
2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर कान लगा, क्योंकि मैं तुझ से बिनती करता हूं।
3 हे यहोवा, भोर को तू मेरी दोहाई सुनता है; भोर को मैं तुझ से प्रार्थना करता हूं, और आशा से बाट जोहता हूं।
4 तू अन्याय से प्रसन्न होने वाला ईश्वर नहीं है; तुम्हारे साथ बुराई नहीं रह सकती।
5 तेरे साम्हने घमण्डी लोग प्रसन्न नहीं होते; तू उन सब से घृणा करता है जो बुराई करते हैं।
6 तू फूठोंको नाश करता है; हत्यारों और विश्वासघातियों से यहोवा घृणा करता है।
7 परन्तु मैं तेरी बड़ी करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा; मैं डर के मारे तेरे पवित्र मन्दिर को दण्डवत् करूंगा।
8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे सामने अपना मार्ग सुगम करो।
9 उनके मुंह से भरोसे की बात नहीं निकलती; उनका मन केवल विनाश की योजना बनाता है। गला एक खुली कब्र है; वे अपनी जीभ से धूर्तता से धोखा देते हैं।
10 हे परमेश्वर, उन को दण्ड दे! उन्हें अपनी ही युक्तियों से गिरने दो। उनके बहुत से अपराधों के कारण उनको निकाल दे, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है।
11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें; हमेशा खुशी से गाओ! उन पर अपनी सुरक्षा बढ़ाएँ। जो तेरे नाम से प्रेम रखते हैं, वे तुझ में आनन्दित हों।
12 हे यहोवा, तू धर्मी को आशीष दे; तेरी कृपा ढाल के समान उसकी रक्षा करती है।
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Modathir Mubark Sunhori
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