1 हे परमेश्वर, हम तेरा धन्यवाद करते हैं, क्योंकि तेरा नाम निकट है; सब तेरे अद्भुत कामों की चर्चा करते हैं।
2 तुम कहते हो: “मैं उस समय को निश्चय करता हूं जब मैं न्याय से न्याय करूंगा।
3 जब पृय्वी अपने सब निवासियों समेत कांप उठती है, तब मैं ही उसके खम्भोंको दृढ़ रखता हूं।
4 अभिमानी से मैं कहता हूं, घमण्ड करना छोड़! और दुष्टों से: विद्रोह मत करो!
5 आकाश से बलवा न करना; अपशब्द मत बोलो"।
6 न तो पूरब से, न पच्छिम से, और न मरुभूमि से, जो उत्कर्ष आता है।
7 न्याय करने वाला परमेश्वर परमेश्वर है: एक को नीचा करो, दूसरे को ऊंचा करो।
8 यहोवा के हाथ में एक कटोरा है, जो चमकते हुए दाखमधु से भरा हुआ है; वह उसे उंडेल देता है, और पृय्वी के सब दुष्ट उसे अन्तिम बूंद तक पीते हैं।
9 मैं इन बातों का सदा प्रचार करता रहूंगा; मैं याकूब के परमेश्वर का भजन गाऊंगा।
10 मैं सब दुष्टोंकी शक्ति को नाश करूंगा, परन्तु धर्मियोंकी शक्ति बढ़ती जाएगी।
Last updated on Apr 5, 2024
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