1 हे परमेश्वर, मेरी दोहाई सुन; मेरी प्रार्थना पर ध्यान दो।
2 मैं पृय्वी के छोर से टूटे मन से तेरी दोहाई देता हूं; मुझ से ऊंची चट्टान पर मुझे सुरक्षित रख।
3 क्योंकि तू मेरा शरणस्थान, और शत्रु के साम्हने दृढ़ गढ़ रहा है।
4 मैं सदा तेरे डेरे में रहने और तेरे पंखों की शरण में रहने की लालसा करता हूं।
5 क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने मेरी मन्नतें सुनी हैं; तू ने मुझे वह भाग दिया है जो तू अपने नाम के डरवैयों को देता है।
6 राजा के जीवन के वर्ष, और उसके जीवन के वर्ष पीढ़ी पीढ़ी तक बढ़ाए जाएं।
7 वह परमेश्वर के साम्हने अपके सिंहासन पर सर्वदा रहे; उसकी रक्षा के लिए अपना प्रेम और अपनी सच्चाई भेजो।
8 तब मैं प्रतिदिन अपक्की मन्नतें पूरी करते हुए तेरे नाम का भजन गाऊंगा;
Last updated on Jul 15, 2024
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