1 हे यहोवा, राजा तेरे बल से आनन्दित होता है! आप उसे जो जीत देते हैं, उस पर उसका कितना बड़ा हर्ष है!
2 तू ने उसके मन की इच्छा पूरी की है, और उसके होठोंकी बिनती को झुठलाया नहीं।
3 तू ने उसे बड़ी आशीष देकर ग्रहण किया, और उसके सिर पर चोखे सोने का मुकुट रखा।
4 उस ने तुझ से जीवन मांगा, और तू ने दे दिया! लंबा और स्थायी जीवन
5 क्योंकि जो विजय तू ने उसको दी है, उसकी महिमा बड़ी है; वैभव और ऐश्वर्य के साथ आपने इसे कवर किया।
6 तू ने उस को सदा के लिये बड़ी आशीष दी, और अपके साम्हने का आनन्द दिया।
7 राजा यहोवा पर भरोसा रखता है, वह परमप्रधान की सच्चाई के कारण न डगमगाएगा।
8 तेरा हाथ तेरे सब शत्रुओं तक पहुंचेगा; तेरा दाहिना हाथ उन सब तक पहुंचेगा जो तुझ से बैर रखते हैं।
9 जिस दिन तू प्रगट होगा, उस दिन तू उन्हें धधकता हुआ भट्ठा बना देगा। अपने क्रोध में यहोवा उन्हें भस्म करेगा, आग उन्हें भस्म कर देगी।
10 तू उनके वंश को पृय्वी पर मिटा देना, और उनका वंश मनुष्योंके बीच में मिटा देना।
11 चाहे वे तेरे विरुद्ध षड्यन्त्र रचें, और बुरी युक्ति करें, तौभी उनका कुछ न होगा;
12 क्योंकि जब तू उन पर धनुष लगाएगा तब तू उन्हें उड़ा देना।
13 हे यहोवा, तू अपने बल में महान हो! हम गाएंगे और आपकी शक्ति की प्रशंसा करेंगे।
Last updated on Apr 15, 2024
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